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कवच

दुर्गा कवच — प्रारम्भ

यह दुर्गा कवच का प्रारंभिक श्लोक है, जिसमें ऋषि मार्कण्डेय भगवान ब्रह्मा से संसार की रक्षा करने वाले उस परम रहस्य को बताने की प्रार्थना करते हैं।

पृष्ठभूमि

दुर्गा कवच मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत आने वाले श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे पारंपरिक रूप से नवरात्रि के दौरान या सप्तशती के मुख्य पाठ से पहले एक सुरक्षा आवरण के रूप में जपा जाता है। भक्तों की मान्यता है कि इसके पाठ से देवी दुर्गा सभी दिशाओं और संकटों से उनकी रक्षा करती हैं।

मार्कण्डेय उवाच। ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥

Markandeya said: O Grandsire, tell me that supreme secret which protects all people in this world, that which has not been revealed to anyone before.